Thursday, 29 March 2012

परिन्दों को नहीं दी जाती तालीम उड़ानों की..
वो खुद ही तय करते हैं मंजिल आसमानों की..
रखते हैं जो होसला आसमां को छूने का..
उनको नहीं होती परवाह गिर जाने की........!!
deepak me deepshikhaa jyoti prajvalit hai aagni se
tan me aatma ki deepshikha prajwalit hai jivan se
sansar ki sari moh maya hai is jan aur jeevan se
jaise jivan ka sar hai jivan ke dhoop aur chhav se..................shweta
संघर्षों में जो निखरी,वो औरत है
खुशबू बनके जो बिखरी, वो औरत है..

कब तक कोई रोक सका है बहता जल
वह तो आगे बढ़ता है केवल कल-कल
औरत भी निर्मल जल, गंगाधारा है.
जिस के बल पर टिका जगत ये सारा है.
आगे बढ़ के ना ठहरी, वो औरत है ..
संघर्षों में जो निखरी,वो औरत है..

कल था उसका, आज और कल भी सुन्दर
साथ उसी के होगी ये दुनिया बेहतर.
यह करुणा का पाठ पढ़ाती रहती है,
जीवन में इक राह दिखाती रहती है.
भीतर-भीतर जो गहरी, वो औरत है..
.संघर्षों में जो निखरी,वो औरत है.......

साथ इसे ले कर के मंजिल को पाना है.
नीलगगन तक इसके संग में जाना है
शिव-पार्वती-सा जीवन हो जाएगा.
तब जीवन का रस्ता ये कट पाएगा.
सबकी खातिर इक प्रहरी, वो औरत है..

संघर्षों में जो निखरी,वो औरत है
खुशबू बनके जो बिखरी, वो औरत है.
आज मेरा मन उदास है
किससे कहूँ?
नहीं कोई आस-पास है
किससे कहूँ?

इस सूनेपन को
एकाकी मन को
इन सन्नाटों को
अनकही बातों को
इन अंधेरों को
दुखों के घेरों को
इस गहराती रात को
अपने मन की बात को
किससे कहूँ?

आज मेरा मन उदास है
किससे कहूँ?
नहीं कोई आस-पास है
किससे कहूँ?
मन्नाओं की फितरत ही कुछ ऐसी है...
ना समझा पाया, ना समझ सका कोई...
ये जुनून कब जीने लगता है ज़िद के लिए...
पैरों से घसीट कर लकीरें बनाना रेत में...
आसां सा हल लगता है परेशानी के लिए...
हर ख्वाहिश को हकीकत के लिबास में पाने की चाहत...
कि कोई भी मचल जाता है, थाली के पानी में रखे चाँद को पाने के लिए !!

dard

आप के   दर्द का आहसास है  हमें, फिर भी आप  पराया करना चाहे हमें
आप  के   तन की छाया  है हम ,आप   फिर भी क्यों  दूर करना चाहे हमें
जानती  हु की जी न सकते है आप  मेरे बिना , फिर भी दूर कर रहे है आप  हमें
समाज की रीत है जानते है हम, फिर भी कुछ तो वक्त दीजिये हमें
पिता  तो सदेव ही आपने बेटियों का इश्वर होता है ,तो क्या आप भुला देगे हमें
हम जानते है की आसान  नहीं  है सब आपके लिए भी तो क्या रोकेगे  नहीं आप  हमें